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क्या आप जानते है रक्षाबंधन पर ‘राखी’ बाँधने के पीछे की असल कहानी?

शुभ मुहूर्त, राखी मंत्र और क्या होती है वैदिक राखी…..

रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसका इंतज़ार हिन्दुस्तान की हर एक बहन साल भर बेसब्री से करती है| इस दिन हर बहन की इच्छा पूरी की जाती है मनचाहे गिफ्ट्स मिलते है| लेकिन इतिहास में पीछे मुड़कर देखा जाए यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के लिए किया गया रक्षा का एक बंधन है। पुराणों के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता दानवों से हारने लगे। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की हो रही हार से घबरा गईं और इंद्र के प्राणों की रक्षा के तप करना शुरू कर दिया, तप से उन्हें एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया, जिससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर जीत प्राप्त की|

किसे राखी बाँधी जाती है

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via – Patrika News

श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधने से इस दिन रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाने लगा। पुराणों के अनुसार आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं, चाहें वह किसी भी रिश्ते में हो। रक्षाबंधन का त्योहार बिना राखी के पूरा नहीं होता, लेकिन राखी तभी प्रभावशाली बनती है जब उसे मंत्रों के साथ रक्षासूत्र बांधा जाए। राखी बांधने का मंत्र – ‘येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!’ इस मंत्र का अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि ने रक्षासूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया। उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न हो और दृढ़ बना रहे।


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इस साल रक्षाबंधन का कैसा है मुहूर्त?

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via – My Kundali Software

12साल बाद ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ग्रहण लग रहा है। इसलिए इस बार राखी के दिन सूतक का भी लगेगा| पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 6 अगस्त 2017 को रात्रि 10:28 बजे से आरंभ होगा परन्तु भद्रा काल व्याप्त रहेगी। कहते है सूपनखा मे अपने भाई रावण को भद्रा में राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण का विनाश हो गया, यानी कि रावण का अहित हुआ। इस कारण लोग मना करते हैं भद्रा में राखी बांधने को। यदि किसी कारणवश भद्रा काल में यह कार्य करना हो तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ काल में रक्षा बंधन का त्यौहार मानना श्रेष्ठ है –

भद्रा पूँछ – 06:40 am से 07:55 am 
भद्रा मुख – 07:55 am से 10:01 am 
भद्रा अन्त समय – 11:04 am
श्रावण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 7/8/2017, सोमवार
श्रवण पूजन का मुहूर्त
दिन के 11:05 am से दोपहर के 1:28 pm बीच में करना है।

क्या होती है वैदिक राखी? कैसे है अभी भी इतनी महत्वपूर्ण?

रक्षाबंधन हमारे सनातन धर्म का सबसे खास त्योहार है। भाई की सलामती के लिए सदियों से यह त्योहार वैदिक रीति से मनाया जाता रहा है। हालांकि वक्त के साथ इसमें बदलाव आए हैं, लेकिन वैदिक रीति का अपना खास महत्व है| रक्षाबंधन की वैदिक विधि में सबसे अहम भूमिका रक्षा सूत्र यानी राखी की है। आज कल बाजार में तरह-तरह की राखियां मिल जाएंगी लेकिन प्राचीन काल में वैदिक राखियां ही बनाई जाती थीं। वैदिक राखी में जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है उसका अपना-अपना प्रतीकात्मक अर्थ भी है। माना जाता है कि ये वैदिक राखी न सिर्फ आपको अपनी विरासत और परंपरा से जोड़ती है, बल्कि आपके भाई की तरक्की के रास्ते के सारे कांटे भी चुन लेती है।

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via – Omved

पुराणों में ऐसा बताया गया है की वैदिक राखी बांधने से भाई की तरक्की होती है| वैदिक राखी बनाने के लिए जो 5 वस्तुएं जरूरी होती हैं जिसमें दूर्वा, अक्षत, केसर, चंदन और सरसों के दाने प्रमुख हैं। इन पांचों चीजों को रेशम या मलमल के कपड़े में बांधकर उसे लाल रंग के कलावे में पिरो दें और इस तरह से वैदिक राखी तैयार हो जाएगी। वैदिक राखी में जिन पांच चीजों का सम्मिश्रण होता है उसका अपना अलग महत्व होता है।

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