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भारत के इन 4 मंदिरों में भगवान नहीं, बल्कि पूजे जाते है राक्षस!


भारत अनेकों सभ्यताओं और धर्मों के लोगो को जोड़कर एक देश बना है | तो लाज़मी सी बात है की यहाँ पर लोगों की आस्था भी अपने अपने धर्मों से जुड़े देवी देवताओं से जुडी हुई है | कोई राम भगवान् को मानता है तो कोई श्री कृष्ण का भक्त है| सब ने अपने देवो की पूजा आराधना के लिए मंदिरों का निर्माण करवाया है | पर यहाँ कुछ सभ्यताएँ ऐसी भी है जहाँ लोगो का विश्वास भगवानो पर ना होकर दानवो पर है| जी हाँ आपको ये जान कर बड़ी हैरानी होगी की भारत एक है देश है जहाँ देवी देवता तो पूजे जाते ही है साथ ही यहाँ राक्षसों और दानवों को भी पूजा जाता है| बचपन से लेकर आज तक हम कई धार्मिक कहानियां भी सुनी होगी जैसे रामायण, महाभारत, श्रीकृष्ण लीला आदि, इन कहानियों में अक्सर देवी देवताओं और दानवों का ज़िक्र होता रहा है|

आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताएगे जहाँ इन्ही कहानियों से जुड़े कुछ असुर पूजे जाते है|

अहिरावण मंदिर, उत्तरप्रदेश

ahiravan temple
via- Jagran

भगवान राम और लक्ष्मण का अपहरण करने वाले रावण के भाई अहिरावण की पूजा उत्‍तरप्रदेश के झांसी इलाके में पचकुइंया में एक मंदीर में की जाती है। इस मंदिर में हनुमान जी के साथ ही अहिरावण की भी पूजा की जाती है। लगभग 300 साल पुराने इस मंदिर में अहिरावण के साथ ही उसके भाई महिरावण को भी लोग पूजते है।

दशानन मंदिर, उत्तरप्रदेश

dhashanan temple
via – youthensnews

रावण का दूसरा नाम दशानन था यानि दुआ सरों वाला| एक असुर होने के बावजूद उत्तरप्रदेश के कानपुर के शिवाला इलाके में दशानन मंदिर बना है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1890 में हुआ था। रावण को ज्ञानी मानकर पूजा किये जाने वाले इस मंदिर के कपाट पूरे साल बंद रहते हैं सिर्फ साल में दशहरे वाले दिन खुलते हैं।

पूतना का मंदिर, उत्तरप्रदेश

putna temple uttarpradesh
via – YouTube

कृष्‍ण को दूध पिलाकर मारने का प्रयास करने वाली राक्षि‍सी पूतना का भी उत्तरप्रदेश के गोकुल में एक मंदिर है। इस मंदिर में पूतना की लेटी हुई मूर्ति है, जिस पर कृष्‍ण छाती पर बैठकर दूध पीते दिखाई देते हैं। इस मंदिर को बनाने के पीछे की मान्‍यता है की श्रीकृष्ण को मारने के उद्देश्य से ही सही लेकिन पूतना ने एक मां के रूप में दूध पिलाया था।

दुर्योधन मंदिर, उत्तराखंड

duryodhan mandir
via – InsistPost

महाभारत युद्ध के खलनायक कहे जाने वाले दुर्योधन को असुर की श्रेणी में रखा जाता है लेकिन फिर भी उत्तराखंड के नेटवार इलाके में बने एक मंदिर में दुर्योधन को एक भगवान् की तरह पूजा जाता है। इस मंदिर के पास ही दुर्योधन के परम मित्र कर्ण का भी मंदिर बना है।

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