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कभी सोचा है की फ्लाइट टेकऑफ और लैंड करते समय फ़ोन ‘Flight Mode’ में क्यों रखा जाता है?

आजकल स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने वालो की भरमार है| अगर आकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में लगभग 60 प्रतिशत मोबाइल यूजर स्मार्ट फ़ोन का इस्तेमाल करते है| लेकिन इस 60 प्रतिशत में आधे से भी ये कम लोग अपने स्मार्ट फ़ोन में मौजूद सभी फंक्शन के बारे में जानते होंगे| हमारा ये आर्टिकल कुछ ऐसे ही विषय पर है जिसमे आज हम आपको ये बताएगे की आपके स्मार्ट फ़ोन में इस्तेमाल में आने वाला फीचर जीसे हम ‘फ्लाइट मोड’ कहते है किस काम आता है और उसका ये नाम कैसे पढ़ा गया| दरअसल कई बार आप नहीं चाहते कि कोई कॉल या मैसेज आपके सेल फ़ोन पर आए, लेकिन हालात ऐसे होते हैं कि आप फ़ोन स्विच ऑफ़ भी नहीं करना चाहते, ऐसे में फ़्लाइट मोड बड़ा काम आता है| फ्लाइट मोड को एक्टिवेट करने पर स्मार्ट फ़ोन से सिग्नलों का आदान प्रदान बंद हो जाता है, जिसकी वजह से कोई काल या मेसेज आपके फ़ोन पर दस्तक नहीं देता और आपको अपना फ़ोन भी बंद करने की जरुरत नहीं पड़ती है|

‘फ्लाइट मोड’ ही क्यों कहते है?

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via – segredosdomundo

लेकिन इसे ‘फ्लाइट मोड’ नाम देने के पीछे की भी एक वजह है, असल में ये फीचर आपको होने वाले डिस्टर्बेंस को कम करने के लिए नहीं बल्कि फ़्लाइट के दौरान इस्तेमाल करने के लिये दिया गया है| क्या आपने कभी सोचा है की फ्लाइट टेकऑफ और लैंड करते समय प्लेन में मौजूद फ़्लाइट अटेंडेंट आपको फ़ोन फ्लाइट मोड में रखने को क्यों कहते है? क्यों आपसे आपके लैपटॉप और स्मार्ट फ़ोन को स्विच ऑफ या स्लीप मोड पर करने के लिए कहा जाता है? आज हम आपको इन्ही सवालों के जवाब बताने वाले है ताकि आप भी इस नॉलेज को आगे शेयर कर सके और दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच अपने ज्ञान का प्रदर्शन कर सकें|



प्लेन में क्यों फ्लाइट मोड पर फ़ोन को करवाया जाता है?

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via- Modern Ghana

आपको जानकार हैरानी होगी की आपका छोटा सा फ़ोन पूरे फ़्लाइट के ऑपरेशन को अवरुद्ध कर सकता है| दरअसल फ़्लाइट मोड पर डालने से आपके स्मार्टफ़ोन की सारी डेटा सर्विसेज़, जैसे वाईफाई, जीएसएम, ब्लूटूथ आदि बंद हो जाते हैं| यदि आपका फ़ोन फ़्लाइट मोड पर नहीं है, तो इसके सिग्नल्स फ़्लाइट की सेंसिटिव इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के सिग्नल्स में बाधा दाल सकते हैं| लैंडिंग और टेक-ऑफ़ फ़्लाइट की सबसे दो संवेदनशील प्रक्रिया हैं, जिनमें बेहद सावधानी की ज़रूरत होती है| इस दौरान पायलट को एअरपोर्ट पर स्थित फ़्लाइट कंट्रोल सेंटर से लगातार संपर्क साधना पड़ता है| ऐसे में आपके फ़ोन के सिग्नल्स इस संपर्क में अवरुद्ध पैदा कर सकते हैं, जिससे पायलट को ट्रैफ़िक कंट्रोलर से मिलने वाले निर्देश ठीक से नहीं सुनाई देने की संभावना बढ़ जाती है|

क्युकी एहतियात इलाज से बेहतर है!

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via – The Atlantic

ये पढ़कर आप समझ गए होंगे की क्यों आपसे प्लेन में सफ़र करते वक़्त लैंडिंग और टेकऑफ के समय ऐसा करने के लिए कहा जाता है| हालांकि एक बार प्लेन हवा में चला जाए फिर आप अपने फ़ोन का मोड नार्मल कर सकते है, पर देखा जाए तो फ़ायदा तो तब भी नहीं है क्युकी इतनी ऊपर तो वैसे भी आपका फ़ोन कोई सिफ्नल रिसीव या सेंड नहीं कर पायेगा| आप फ़्लाइट के दौरान अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें डेटा एक्सचेंज की सुविधा, यानि, वाईफाई, जीएसएम और ब्लूटूथ न हो| यही कारण है कि फ़्लाइट में कैमरा, रिकॉर्डर आदि इस्तेमाल करने से कोई समस्या नहीं होगी| तो बेहतर यही होगा की आप पूरी फ्लाइट के दौरान इसे फ्लाइट मोड पर ही रखे और किसी अनदेखे खतरे को निमंत्रण देने से बचे|

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